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Tuesday, 25 June 2013

68 बीका राठोड़ और उनकी 24 खापें और ठिकाने

68. बीका राठोड़ :- बीका जोधपुर के राव जोधा का पुत्र था | जोधा का बड़ा पुत्र नीबा जोधा की हाडी राणी जसमादे के पुत्र थे | वे पिता को विधमानता में हि मर गए थे | जसमादे के दो पुत्र सांतल और सूजा थे | मालूम होता हे बीका सांतल से बड़े थे | इस बात का संकेत कवि जयसोन द्वारा रचित विक्रमी संवत 1650 कर्मचन्द्रोत्किर्तानक काव्यम, से मिलता है | उसमे लिखा हे की जसमादे के बड़े पुत्र नीबा की म्रत्यु हो जाने पर उसके सोतिया डाह उत्पन्न हुआ और राजा से विक्रम ( बीका ) के अनुप्स्थ्ती में अपने पुत्र के विषय में रोचक कथा कही | राजा ने राणी के कपटजाल में आकर vikram बीका को जजंगल में निकल देने की इच्छा से बीका को बुलाया और कहा हे पुत्र | बाप के राज्य को बीटा भोगे , यह कोई अचरज की बात नहीं हे परन्तु जो नया राज्य कायम करें वही बेटों में मुख्या कहा जाता है | तुम साहसी हो जांगल देश पर अधिकार करो | जोधपुर का जोधा के बाद गद्दी पर बेठने वाले सांतल से बीका बड़े थे| सांतल की म्रत्यु के बाद जब सूजा गद्दी पर बेठे तो बीका ने सूजा पर आक्रमण किया | बीकानेर राज्य की जन्म पत्री में बीका का जन्म विक्रमी 1495 अंकित किया है | तथा जोधपुर की जन्म पत्री में बीका का जन्म 1496 अंकित किया है | टेसीटोरी में मिली दूसरी ख्यात में सूजा का जन्म विक्रमी विक्रमी 1499 है | अतः इससे प्रसन्न हल नहीं होता है कोन बड़े थे | पर बीका ने सूजा से जोधपुर की पूजनिक चीजों को लेकर हि सूजा से संधि की | इससे भी जाना जाता है की बीका सांतल से बड़े थे | पित्र भक्ति के कारन उन्होंने आपने चाचा कांधल के साथ होकर जांगल प्रदेश पर अधिकार कर नया राज्य स्थापित कर लिया | और सातल को जोधपुर की गद्दी मिलने पर कोई एतराज नहीं किया | इन्ही बीका के वंशज बीका राठोड़ कहलाते है | इनकी खापें निम्न प्रकार है |
1. घड़सिहोत बीका राठोड़ :- बीका के पुत्र घड़सी के वंशज घड़सिहोत बीका कहलाते है | घड़सी के नाम पर घड़सीसर ( बीकानेर से पूर्व में ) बसा हुआ है | घड़सी के दो पुत्र थे | बड़े पुत्र देवीसिंह को गारबदेसर व छोटे पुत्र डूंगर सिंह को घड़सीसर मिला | यह दोनों इकलड़ी ताजीम वाले ठिकाने थे |
2. राजसिंहोत बीका राठोड़ :- बीका के पुत्र राजसिंह के वंशज 
3. मेघराजोत बीका :- बीका के पुत्र मेघवाल के वंशज |
4.केलण बीका :- बीका के पुत्र केलण के वंशज |
5. अमरावत बीका :- बीका के पुत्र अमरा के वंशज |
6. बीसावत बीका :- बीका के पुत्र बीसा के वंशज |
7. रतनसिंहहोत बीका :- लूणकरण के पुत्र रतनसिंह के पुत्र रतनसिहोत बीका कहलाते है | इनका मुख्या ठिकाना महाजन था | रतनसिंह को महाजन मिला था | सिरायत ठिकानों में यह ऐक था | सांगा आमेर की सहायतार्थ बीकानेर की सेना में रतनसिंह शामिल था | रतनसिंह के बाद उनके पुत्र अर्जुनसिंह गद्दी बेठे | मालदेव के विरुद्ध बीकानेर की सहायता मांगने पर बीकानेर की फौज के साथ अर्जुनसिंह भी थे | सूरसिंह के राज्यकाल में जोहियों को दबाने महाजन के उदयभाण ने वीरता पूर्वक युद्ध किया | इसमें माछोटा के पास उनके 18 तथा नोहर के पास २ पुत्र काम आये | महाजन के ठाकुर भीम सिंह ने बीकानेर राजा जोरावर सिंह को समय -समय पर विद्रोहियों को दबाने में सहायता की | महाराजा रतनसिंह ने विक्रमी संवत 1886 में जैसलमेर  पर बैरीशाल महाजन के नेत्रत्व में सेना भेजी | बैरीशाल की गतिविधियों से बीकानेर नरेश नाराज हो गया परन्तु क्षमा मांगने पर उन्हें क्षमा कर दिया , कुछ लोगो को मरवा देने से बीकानेर राजा ने फिर महाजन को खालसे कर दिया | बीकानेर नरेश के साथ बैरीशाल के साथ कई वर्षों तक संघर्ष चला फिर समझोता होने पर पुनः महाजन मिल गया | बीकानेर की पब्लिक वर्कर्स कमेटी के सदस्य तथा राज्पुजत हितकारिणी सभा के उप सभापति थे | गंगासिंह ने रजत जयंती पर राजा की उपाधि दी | इसके बाद भूपालसिंह राजा बने |
रतनसिहोत बीकाओं का दूसरा ठिकाना कुंभाणा था | रतनसिंह के सातवे वंशज केशरीसिंह को यह ठिकाना मिला | यह ताजमी ठिकाना था | रतनसिंह के बाद क्रमश अर्जुनसिंह महाजन के शासक हुए | अभय सिंह महाजन के पुत्र भायसिंह के वंशज भायसिहोत बीका कहलाते है | इनका मुख्या ठिकाना राजासर ( लूणकर्णसर से 16 मील पूर्व में ) था | इसके अतिरिक्त सेनिवाला , बिलोचिया आदी गाँव उनकी जागीर में था | अभय सिंह के पुत्र मोहकम सिंह को कांकडवाला की जागीर मिली |
8.प्रतापसिहोत बीका :- बीका के पुत्र लूँणकरण के पुत्र प्रतापसिंह के वंशज प्रतापसिहोत बीका कहलाते है |
9.नारनोत बीका :- लूँणकरण के पुत्र बैरसी के पुत्र नारण के वंशज नारनोत बीका कहलाते है | बीकानेर रियासत में मगरासर मैणसर , तेणसर ,तेणदेसर ,कातर,बड़ी इनके मुख्या ठिकाने थे | मगरासर दोलड़ी ताजीमवाला ठिकाना था |
1. बलभद्रोत नारनोत बीका :- नारण के पुत्र बलभद्र के वंशज ठी. महदसर 
2. भापपोत नारनोत:- नारण के पुत्र भोपत के वंशज है ठी मगरासर 
3. जैमलोत नारनोत :- नारण के पुत्र जैमल के वंशज है ठी. तेणदेसर ,कातर आदी |
10. तेजसिहोत बीका :- लूणकरण के पुत्र तेजसिंह के वंशज |
11. सूरजमलोत बीका :- लूणकरण के पुत्र सूरजमल के वंशज |
12करमसिहोत बीका :- लूणकरण के पुत्र करम जी के वंशज |
13. रामसिहोत बीका :- लूणकरण के पुत्र रामसिंह के वंशज |
14.नीबावत बीका :- लूणकरण के पुत्र रूपा के पुत्र नीबा के वंशज \
15. भीमराजोत बीका :- बीकानेर के लूणकरण के पुत्र जैत सिंह के दुसरे पुत्र भीमराज के वंशज भीम्रजोत कहलाते है | जोधपुर के शासक मालदेव राठोड़ ने बीकानेर पर आक्रमण किया | इसमें बीकानेर के राजा जैतसिंह ने वीरगति प्राप्त पाई | मालदेव का बीकानेर पर अधिकार हो गया | जैतसिंह के पुत्र कल्याणदास सिरसा में राजगद्धी बेठे | भीमराज शेरसाह के पास गए और शेरशाह की सहायता से मालदेव को बीकानेर से हटाया और आपने भाई कल्याणमल का अधिकार बीकानेर पर करवा दिया | इससे प्रसन्न होकर कल्याणमल ने भीमराज को विक्रमी संवत 16०२ में भोमसार की जागीर दी | रायसिंह की अकबर के समय गुजरात पर चढ़ाई होने पर उस युद्ध में भीमराज के पुत्र नारंग ने वीरगति पायी |इनके वंशधर हिम्मत सिंह को गजसिंह ने राजपुरा गाँव जागीर में दिया | राजपुरा दोलड़ी ताजीम वाला ठीकाना था | यहीं अमर पूरा , कुशुम्बी , भुवाड़ी आदी भीमराजोत बीकाओं के गाँव है |
16. बाघावत बीका :- बीकानेर के राजा जैतसी के पुत्र ठाकुरसी के पुत्र बाघ सिंह के वंशज बाघावत बीका कहलाते है | बाघसिंह को पहले भटनेर की जागीरी मिली फिर उनके पुत्र रघुनाथ सिंह को भटनेर के स्थान पर नोहर की जागीरी मिली | इसके बाद नोहर की जगह मेघाणा की जागीरी तथा ताजीम का सम्मान मिला | 
17.माधोदासोत बीका :- राव जैतसी के पुत्र मानसिंह के पुत्र माधोदास के वंशज |
18.मालदेवोत बीका :- लूणकरण के पुत्र जैतसिंह के पुत्र मालदे के वंशज |
19.श्रंगोत बीका :- बीकानेर राजा जैतसी के कई पुत्रों में ऐक पुत्र श्रंग़ थे | इनके वंशज श्रंगोत बीका कहलाते है | मालदेव जोधपुर ने जब मेड़ता पर आक्रमण किया तब जयमल राठोड़ ने बीकानेर से सहायता मांगी | बीकानेर नरेश कल्याणमल ने आपने भाई श्रंग को सहायता के लिए भेजा | उनके पुत्र भगवान् दास , रामसिंह द्वारा अहमदाबाद पर चढ़ाई करने के समय उनके साथ रहकर युद्ध किया और वीरगति पायी | इनके पुत्र manohar दास के पुत्र किशन सिंह को शोध मुख की जागीरी मिली | भूकरका के ठाकुरों ने बीकानेर की समय -समय पर बहुत सहायता की थी |महाराजा अजीतसिंह द्वारा विक्रमी संवत 1763 में बीकानेर पर आक्रमण करने के समय भूकरका के ठाकुर ने प्रथ्विराज ने वीरता का परिचय दिया | भूकरका के ठाकुर कुशल सिंह स्वाभिमानी तथा बड़े बहादुर थे | विक्रमी संवत 1797 मे अभय सिंह ने जब बीकानेर पर आक्रमण किया तब गढ़ में रहकर कुशलसिंह ने वीरता से अभय सिंह की सेना का मुकाबला किया और किले पर अधिकार न होने दिया | जोरावर सिंह बीकानेर के निसंतान मरने पर कुशलता से आनंद सिंह के दुसरे पुत्र गजसिंह को गद्धी बिठाया | जोधपुर की सहायता से अमर सिंह राजवी ने फिर हमला किया तो कुशलसिंह हरावल में रहकर बीकानेर की रक्षार्थ लड़े \ इनके बाद वाले ठाकुरों ने भी समय -समय पर बीकानेर की सहायता की |भुकरका के अतिरिक्त सीधमुख , बाय ,जसाणा , बिरकाली ,मुनसरी,अजीतपुर ,रासलाणा ,कानसर ,रणसीसर ,जवजसर ,शिमला ,थिराणा  आदी ठिकाने थे |
21.गोपलदासोत बीका :-राव जैतसिंह के पुत्र राव कल्याणमल बीकानेर के पुत्र गोपालदास के वंशज 
 22.प्रथ्विराजोत बीका :- बीकानेर राजा कल्याणमल के ऐक पुत्र प्रथ्विराज थे | प्रथ्विराज अकबर के दरबार में रहते थे | वे उस समय के उच्च कोटि के साहित्यकार थे | डिंगल के जबरदस्त विद्वान् थे | उन्होंने वेलिकर्सन रुकमणी जैसे ग्रंथों का निर्माण किया | कहा जाता हे की महाराणा प्रताप ने निराश होकर अकबर की अधीनता मानने का पत्र लिख दिया | प्रथ्विराज ने हि अपनी ओजस्वी लेखनी से राणा की निराशा को दुर किया | वे जबरदस्त वीर भी थे | स्वयं अकबर भी इनका सम्मान करता था | काबुल व अहमदनगर की लड़ाइयों में इन्होने वीरता प्रदर्शित की | इसी प्रथ्विराज के वंशज प्रथ्वीराजोत बीका कहलाते है | इनका मुख्या ठिकाना ददेरवा के पास हि मैलाणा , पाबासी,मानपुरा ,सेवा ,धोलिया आदी 12 गाँव इनके है | दादरेवा दोलड़ी ताजीम का ठिकाना था |
23.किशनसिहोत बीका :- राव कल्याणमल के पुत्र किशनसिंह थे | इनके वंशज किशनसिहोत बीका कहलाते है | किशनसिहोतों के सांखू ( दोलड़ी ताजीम ) नीमा ( दोलड़ी ताजीम ) रावतसर , कुंजाला ( सादी ताजीम ) के ठिकाने थे \
23.अमरसिहोत बीका :- बीकानेर राव कल्याणमल के छोटे पुत्र अमरसिंह के वंशज अमर्सिहोत बीका कहलाते है | इनका हरदेसर ( दोलड़ी ताजीम ) का ठिकाना था |
24.राजवी बीका :- महाराजा अनूपसिंह बीकानेर के छोटे पुत्र आनंदसिंह के चार पुत्र अमरसिंह , गजसिंह तारा सिंह ,व गुदड़सिंह थे | इन चारों पुत्रों के वंशज राजवी कहलाते है | महाराज जोरावरसिंह निसंतान मरने के कारन गजसिंह राजा बनाये गए | गजसिंह ज=के भाई होने के कारन वे राज्य से अधिक निकट थे | अतः इन्हें राजवी कहा गया | राज्वीयों की उपखापों में अमरसिहोत ,तारासिहोत , गुदड़सिहोत ,राजवीयों का चंगोई इकलड़ी ताजीम का ठिकाना ,गुदड़सिहोत राजवीयों का महेरी इकलड़ी ताजीम का ठिकाना था |
गजसिंह के पुत्र छत्रसिंह के वंशज ड्योढी वाले राजवी कहलाते है | इनकी उपाधि 'महाराजा ' तथा ताजीम का सम्मान प्राप्त था | इनके अनूपगढ़ ,खारडा व रिड़ी ठिकाने थे | गजसिंह के दुसरे पुत्र सुल्तानसिंह ,मोहकमसिंह ,देवीसिंह ,आदी के वंशज हवेली वाले राजवी कहे जाते है | इनमे सुल्तानसिंह के वंशजों के बानिसर,नाभासर व् आलसर ठिकाने थे | मोहकमसिंह के वंशजों कोसाइसर ठिकाना था तथा मारवाड़ में जांभा गाँव था  व देवीसिंह के वंशजों के सलुंडीया ,कुरझडी व बिल नियासर ठिकाने थे 
लगातार .............
अगला बीदावत राठोड़ 
जय श्री कृष्णा 

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