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Thursday, 25 July 2013

चौहानों की खापें ,13 मादेचा,नार,घुन्घेट,सूरा और गोयलवाल ,मालानी,पावेचा ,देवड़ा ,सेलोत , अनगिनत शाखाएं चौहानों की

 मादेचा :- वीर विनोद में किसी लालसिंह नामक चौहान के मद्रदेश में जाने के कारन वंशजों को मादेचा लिखा है | मानकराज के वंशज लालसिंह के वंशधरों को मद्र देश के कारन माद्रेचा लिखा है इनका देसुरी में राज्य था | राना रायमल चितोड़ के समय देसुरी में राज्य था | राना रायमल चितोड़ के समय सोलंकियों ने इनका राज्य छीन लिया | जिला उदयपुर में मादड़ी गाँव है | उदयपुर राज्य में हि देसुरी में इनका राज्य था | लालसिंह कोन थे कान मद्र देश गए कोई साक्ष्य नहीं है | मालूम होता है की मादड़ी गाँव में रहने के कारन मादडेचा( माद्रेचा ) चौहान कहलाये | जेसे महेवा स्थान के नाम से महेवा राठोड़ों की उत्पति हुयी वेसे | बहुत संभव हे की माद्रेचा लाखन नाडोल के वंशज हो |

14.नार चौहान :- बहीभाटों के अनुसार लाखन के वंशज मारवाड़ में है |
15.घूंघेट (धंधेर) :- माणकराज सांभर के वंशज किसी घुंघेट के वंशज बताये जाते है | कोटा जिले के शाहपुरा दुर्ग पर कभी इनका राज था | वि.सं.१७१५ के घरमत युद्ध में राजा इंद्रमणि धंधेर ओरंगजेब के पक्ष में लड़ा |
16.सूरा और गोयलवाल :- चौहानों की 24 खाप में सूरा और गोयलवाल भी अंकित है | परन्तु इनकी उत्पति का पता नहीं लगता है | क्याम खां ने अपने रासा में कुछ इस तरह लिखा है -
मनिरायी के जानियों ,भयो राई भूपाल |
कह्कलंग ताके भये सूरा गोत गुवाल || 72 ||

17 मालानी : संभवतः मालानी क्षेत्र पर शासन करने के कारन ये मालानी चौहान कहलाये | लाखन नाडोल के वंशज होना समीचीन है |
18.पावेचा :- संभतः लक्ष्मण नाडोल के वंशज है | जैसलमेर क्षेत्र में है |
19 देवड़ा : इनका सम्पूरण वर्णन आगे दिया जायेगा |
 अन्य खापें :- विभिन्न पुश्तकों में चौहानों के अन्य खापें के नाम मिलते है पर न तो उनकी उत्पति का पता चलता है और न हि वर्तमान में उनके निवास स्थान का | फिर भी जानकारी के लिए उन खापों को यहाँ अंकित करता हूँ |

टाड के अनुसार : पाविया , सक्रेचा ,भूरेचा ,चाचेरा ,रोई ,चादू निकुम्प ,भांवर व् बंकट |
नेणसी के अनुसार :- रावसिया ,गोला ,डडरिया ,बकसरिया ,बेहोल ,बोलत ,गोलासन ,नहखण ,वैस ,सेपटा ,डीमणीया,हुरड़ा ,महालण ,बंकट

सेलोत )सेह्लोत :- यह पाकिस्तान में रहते है कुछ घर इनके १९७१ में सोढो के साथ भारत आ गए लेकिन वहा केसे गए इसका कुछ पता नहीं और किनके वंशज हे यहाँ किसी गाँवो में एकाध घर रहता है तुड्बी हरसानी बाड़मेर जिले में ऐक -दो घर इनके है सायद इनके पीछे अमरकोट सोढों से कुछ कहानी जुडी है |

बहादुर सिंह बीदावत के अनुसार : - पंजाबी ,टंक ,पंडीया ,गुजराती,बंगड़ीया,गोलवाल,पूठवाल ,मल्यचा,चाहोड़ा ,हरीण,माल्हण,मुकलारा,चक्रडाणा ,सूवट ,चित्रकारा,भेरव ,क्षयरव ,अभ्रवा,व्याघोरा,सरखेल ,मोरेचा,पबया ,बहोला ,गजयला ,तिलवाड़ा,सरपटा ,चित्रावा ,चंडालिका ,बडेरा,मोरी ,रेवड़ा ,चंदणा ,बंकटा ,वत्सला ,पावचा,झूमरिया,तुलसीरछन ,सलावत ,डिडूरिक ,बछ्गोती ,राजकुवार,राजवार,चारगे,मोतिया ,मानक ,अबरा ,गोठवाल ,जाम बड्ड,मालण पचवाणा (लालसोट मै है ) छाबड़ा (बनिया है ) आदरेचा,बागड़ेचा ,मानभवा,बालिया,जोजा ,जनवार "( अवध में बलरामपुर ठिकाना था )|

बकाया राजपुताना अनुसार :- संगरायचा ,भूरायचा,बिलायचा,तसिरा,चचेरा ,रोसवा,चुंदु ,निकुम्प ,भवर ,बाकेता,मलानी ,(नेपाल) गिरामंडला
कप्तान पिंगले ने युक्त प्रदेश में कुछ खापें बताई है
विजय -सयहिया,खेरा,पूया,भाहू ,कमोदरी ,कनाजी,देवरिया ,कोपला,नहिरिया ,कसमीड ,आवेल ,बाली ,बनाफर ,गलखबरहा, चलेय ,रामचन्द्र व् चितरंग चौहान (पंजाब में है ) 

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