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Thursday, 11 July 2013

चौहान राजवंश रणथम्भोर राज्य २.

२.रणथम्भोर राज्य :- प्रथ्विराज के पुत्र गोविन्दराज ने रणथम्भोर दुर्ग को हस्तगत किया \ इनके पुत्र का नाम वाल्हण था | वाल्हण का बड़ा पुत्र प्रह्लाद गद्धी पर बेठा और छोटा पुत्र वाग्भट्ट मंत्री बना | शेर का शिकार करते हुए प्रह्लाद घायल हुए और म्रत्यु प्राप्त हुए | इनके बाद इनका पुत्र वीरनारायण के बाद गद्धी बेठा | इल्तुतमिश ने उन्हें दिल्ली बुलवाया और विष देकर मार डाला वीरनारायण के बाद वाग्भट्ट शासक हुए उन्होंने आपने राज्य को मुसलमानों से बचाया | वाग्भट्ट के पुत्र जैतसिंह ने दिल्ली सुल्तान नसिरुध्धीन के आक्रमण को असफल कर दिया | जैतसिंह के तीन पुत्र हमीर .प्रताप व वीरम थे | उन्होंने अपने जीवन काल में हि हमीर को विक्रमी संवत 1339 ई. सं. 1282 में शासक बना दिया था | हमीर ने गद्धी पर बैठते हि विजय अभियान शुरू किया और चितोड़ ,वर्धनपुर ,पुष्कर आदी प्रदेशों पर अधिकार कर राज्य का विस्तार किया | दिल्ली सुल्तान अलाऊधिन खिलजी ने रणथम्भोर छीनने का प्रयत्न किया परन्तु असफल रहा |
अलाऊधिन के विद्रोही मुहम्मद शाह ने अलुगखा और नसरतखां के जालोर खेमें से भागकर हमीर के यहाँ शरण ली | हमीर ने मुहम्मद शाह को अलाऊधिन के चाहने पर भी वापिस नहीं लोटाया तब अलाऊधिन ने विक्रमी 1356 में बड़ी सेना रणथम्भोर पर आक्रमण करने भेजी | अलुगखां के नेत्रत्व में बादशाही फौज लडती रही | कभी राजपूत जीतते कभी मुसलमान | परन्तु यह लडाई वि.सं.1348 तक दो वर्ष चलती रही | अंत में अलाऊधिन के स्वयं आने पर व हमीर की सेना के फूट डालने पर 11 जुलाई 1301 वि.1348 को अलायुधिन का किले पर अधिकार हो सका | किला अलुगखां को सोंप दिया गया | हमीर बहादुरी से लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ |

रणथम्भोर राजवंश
१.गोविन्दराज (1194 ई.)
२.वाग्भट्ट (१२२६ई.)
३.वल्हण (१२१५ ई.)
४.जैत्रसिंह
५ प्रह्लादन
६.वीरनारायण
७.हमीर (1282 -1303 ई.)

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