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Friday, 12 July 2013

३.चौहान राजवंश नाडोल (पाली ) राज्य

३.नाडोल राज्य :- सांभर के चौहान वाक्पतिराज (प्रथम ) के बड़े पुत्र सिंहराज पिता के उतराधिकारी हुए और छोटे पुत्र लाखन (लक्ष्मण ) ने नाडोल (जिला पाली )पर अधिकार कर अलग राज्य की स्थापना की | जिसके समय के दो शिलालेख १०१४ वि. व १०३६ वि.के नाडोल में मिले है | लाखन के यों तो 24 पुत्र माने गए है | कहा जाता है उनसे 24 शाखाएं उतपन्न हुयी पर इनका कोई वृतांत उपलब्ध नहीं है | लाखन के पुत्रों में शिलालेख तथा ख्यातों में चार नाम मिलते है :-शोभित ,विग्रहपाल ,अश्वपाल तथा जैता
लाखन (लक्ष्मण )के बाद उसके बड़ा पुत्र शोभित (धारानगरी (भीनमाल ) का शासक हुआ |( सेवाड़ी दान पात्र ११७६ वि.) चौहान कुल कल्प द्रुम में भी शोभित का भीनमाल में शासन करना लिखा गया है | ऐसी स्थति में नाडोल में लक्ष्मण का उतराधिकारी शोभित न होकर उसका पुत्र बलिराज हुआ | शोभित से भीनमाल की अलग शाखा चली |
बलिराज या उतराधिकारी इसके चाचा विग्रहपाल का पुत्र महेंद्र हुआ | महेन्द्रपाल का उतराधिकारी लाखन के पुत्र अश्वपाल का पुत्र अहिल हुआ | इसके बाद अहिल गद्धी महेंद्रराज के पुत्र अणहिल को मिली | इसने वि.१०८२ में गजनवी से भी टक्कर ली | आणहिल के दो पुत्र बालाप्रसाद व् जेन्द्रराज नाडोल के शासक हुए | आसराज के पुत्र जाजलदेव का वि.११४७ ,जेन्द्रराज के समय का वि.सं, ११२४ का शिलालेख है | जेन्द्र्राज के तीन पुत्र प्रथ्विपाल,जोजलदेव व् अश्वराज ( द्वित्य थे | ये तीन भाई क्रमशः नाडोल के शासक हुए |
अश्वराज के समय का ११६७ वि.का सेवाड़ी शिलालेख है ,जिसमे अश्वराज को महाराजाधिराज कहा गया है | अश्वराज का आखिरी अभिलेख वि.११७२ का है | अश्वराज से नाडोल की गद्धी प्रथ्विपाल के पुत्र रतनपाल ने छीन ली | और उसके बाद कटुकराज राजा बन गया | पर शीघ्र हि रतनपाल का पुत्र रायपाल गद्धी पर बैठा | ११८४ वि.से १२०२ शिलालेख है जिससे मालूम पड़ता है की यह भी प्रसिद्ध शासक था | कई वर्षों बाद अश्वराज (द्वित्य ) के पुत्र आल्हण ने फिर नाडोल पर अधिकार कर लिया | शिलालेखों में आल्हण के दो पुत्र केल्हण और कीर्तिपाल के नाम मिलते है | आल्हण के बाद उसका बड़ा पुत्र केल्हण नाडोल का शासक बना और कीर्तिपाल ने जालोर पर अधिकार किया | केल्ह्ण के तीन पुत्र जयत्सी ,चामुंडराज व् सोढलदेव थे | केल्हण के बाद जयत्सी नाडोल का शासक बना और इसके बाद उसका पुत्र सामंतसिंह | सामंतसिंह से जालोर के चौहानों ने नाडोल छीन लिया और इसके साथ हि वि.की १२वि ,शती के उतरार्ध में नाडोल से चौहानों का राज्य समाप्त हुआ |

नाडोल राजवंश
१.लाखन (९४३-९८२)
२.बलिराज
३ महेंद्र
४.अहिल
५.अणिहल
६.बालाप्रसाद
७.जेन्द्रराज (१०६७ ई.)
८.प्रथ्विपाल
9.जोजलदेव (१०९० ई)
१०.आसराज (१११०-१११५ ई.)
11.रतनपाल (१११९ई.)
१२.कटुदेव (१११५ ई.)
13.रायपाल (११२७-११४५ ई.)
14.आल्हण (११५२-११६३)
15.केल्हण (११६३-११९३ )
16 जयतसिंह ११(११९३-११९७ई.)
17.सामंतसिंह (११९७-१२०२ ई.)

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