अनादिकाल काल से चले आ रहे सनातन धर्म की जय हो

Sunday, 21 July 2013

चौहान खापें , २.चाहिल ३.मोहिल ४ .जोड़ ५.पूर्बिया.६.सांभरिया

२.चाहिल :- चौहान वंश में अरिमुनी ,मुनि ,मानिक व् जैपाल चार भाई हुए | अरिमुनी के वंशज राठ के चौहान हुए | मानक (माणिक्य ) के वंशज शाकम्भरी (सांभर ) रहे | मुनि के वंशजों में कान्ह हुआ | कान्ह के पुत्र अजरा के वंशज चाहिल से चाहिलों की उत्पति हुयी | रिणी वर्तमान (तारानगर ) के आसपास के क्षेत्रों में १२वीं ,13वीं  शताब्दी में चाहिल शासन करते थे | और यह क्षेत्र चाहिलवाड़ कहलाता था | आजकल प्रायः चाहिल मुसलमान है | गोगामेड़ी (गंगानगर ) के पुजारे चाहिल मुसलमान है |

३.मोहिल :- कन्य चौहान के पुत्र बच्छराज के किसी वंशज मोहिल के वंशज मोहिल चौहान कहलाये | मोहिल ने बगड़ीयों से छापर -द्रोणपुर जीता | इन्होने 13वीं सदी से लेकर 16वीं शदी विक्रमी के प्रारंभ तक शासन किया | बीका व् बीदा राठोड़ों ने मोहिलों का राज्य समाप्त किया | बाद में प्रायः मोहिल चौहान मुसलमान बन गए | प्रसिद्द कोडमदे माणिक्यराव मोहिल की पुत्री थी |

४.जोड़ चौहान :- सिध के किसी वंशज मोहिल के जोड़ले पुत्रों से जोड़ चौहानों की उत्पति हुयी | वर्तमान झुंझुनू व् नरहड़ इलाके पर विक्रम की 11वीं शदी से 16वीं शदी के प्रथम दशक तक जोड़ चौहानों का अधिकार रहा |  16वीं शदी के प्रारंभ में कायमखानियों ने जोड़ चौहानों से झुंझुनू छीन लिया तथा नरहड़ पठानों का इलाका छीन लिया | चौहानों की यह खाप अब लोप हो चुकी है |

५.पूर्बिया चौहान मैनपुरी :-  मैनपुरी ( उ.प्र.) के पास जो चौहान राजस्थान आये वे पूर्बिया चौहान कहलाये क्यूँ की मैनपुरी राजस्थान के पूर्व में है | मैनपुरी के पास से चन्दवाड़ से चन्द भान चौहान अपने चार हजार वीरों के साथ खानवा युद्ध वि.1584 में राना सांगा के पक्ष में आये तथा तथा मैनपुरी के पास स्थ्ति राजोर स्थान के मानिकचंद चौहान भी खानवा युद्ध में राणा सांगा के पक्ष में लड़े | इन दोनों के वंशज पूर्बिया चौहान कहलाते है | सवाल यह है की चन्द्र भान व् माणीक किनके वंशज थे ? श्यामलदास जी ने लिखा हे की माणिक्य राज चौहान के पुत्र हनुमान के वंशज पूरबिया चौहान थे | ओझा जी ने लिखा हे की चंदभान हम्मीर रणथम्भोर के भाई बंधुओं का वंशज था | व् माणिकचंद प्रथ्विराज चौहान १११ के भाई बंधुओं का वंशज था | पर उन्होंने कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया है | चंदवाड़ ( मैनपुरी के पास ) चौहानों ने वि.की 13 शदी के उतरार्ध से 1480 वि.तक शासन किया है | ये चौहान सम्भवतः घांघू (चुरू ) के चंद चौहान के वंशज थे | अतः पूरबिया चौहान चन्दवाड़ पर शासन करने वाले चौहान के वंशज होने चाहिए |
खानवा के युद्ध में राना सांगा के पराजीत होने के बाद भी चन्दभान तथा माणिकचंद के वंशज मेवाड़ में हि रहे | चंदभान के के बाद क्रमशः प्रतापसिंह तथा बलुजी हुए | बलुजी को राना अमरसिंह प्रथम ने बेदला की जागीर दी | बेदला के स्वामी रामचंद के दुसरे पुत्र केशरीसिंह को पारसोली का ठिकाना मिला | चंदभान के हि वंशज केशर के पुत्र सामंत सिंह को डूंगरपूरा महारावल ने बीडवाड़ा की जागीर दी | चंदभान के ऐक वंशज माधोसिंह के वंशज माघावत पूरबिया चौहान कहलाये | इनका ऐक ठिकाना बमासी था | माणिकचंद के वंशजों का मेवाड़ में कोठारिया प्रसिद्द ठिकाना था | मैनपुरी से निकलने वाले चौहानों का विष्णुपुर -रायपुर (बिहार ) का भी छोटा राज्य रहा |

६.सांभरिया चौहान :- सांभर क्षेत्र से निकलने के कारन सांभरिया चौहान कहलाये |

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