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Tuesday, 9 July 2013

चौहान शासक का अजमेर राज्य

१.अजमेर राज्य :- प्रथ्विराज प्रथम के पुत्र अजयराज हुए | उन्होंने उज्जैन पर आक्रमण कर मालवा के परमार शासक नरवर्मन को पराजीत किया | अपनी सुरक्षा के लिए उन्होंने 1113 ई वि. 1170 के लगभग अजमेरू-अजमेर की स्थापना की | उन्होंने आपने सिक्के चलाये | यह अजमेर के प्रथम शासक माने जा सकते है | यह धर्म राजा jain धर्म में भी आस्था रखता था | इन्होने आपने नगर में jain धर्म मंदिर बनाने की अनुज्ञा दी स्वयं ने पार्श्वनाथ मंदिर के लिए स्वर्ण कलश प्रदान किया | आपने जीवन के अंतिम समय में अपने पुत्र अर्नोराज को राज्य देकर स्वयं पुष्कर राज में जाकर रहे |
अर्नोराज (वि. 187-1212) ने अजमेर पर आक्रमण करने वाले तुर्कों को पराजीत किया | वह शक्तिशाली राजा थे | उन्होंने परमारों चालुक्यों आदी से संघर्ष किया तथा अजमेर में आसागर झील व् पुष्कर में वराह मंदिर का निर्माण करवाया | उनके पुत्र जगदेव ने इस प्रख्यात राजा की हत्या कर दी |
जगदेव के बाद उनके भाई विग्रह्रराज ४ गद्धी पर बैठे | उन्होंने दिल्ली के तोमरों को पराजीत किया ,मुसलमानों से पुजाब,हिसार आदी जीत लिए | चालुक्य कुमारपाल से पाली ,जालोर और नागौर छीन लिए | ये राजा साहित्य और कला के भी प्रेमी थे | उनके दरबारी कवि सोमदेव ने ललितविग्रह राज नाटक लिखा | उन्होंने स्वयं ने हरकेली नाटक लिखा | अजमेर में उन्होंने संस्कृत विधालय का निर्माण करवाया जिसको मुस्लिमों ने खंडित कर दिया | उसको आजकल अढाई दिन का झोंपड़ा कहते है | इसके काल को चौहान इतिहास का स्वर्ण काल कहा गया है | आधुनिक इतिहासकारों ने इस राजा की मुक्वकंठ से प्रसंशा की है |
विग्रहराज 4 के बाद अपरागांगेय और उसके बाद प्रथ्विराज द्वतीय शासक हुए | उनका मुसलमानों से संघर्ष चलता रहा | उनकी म्रत्यु १२26 के लगभग हुयी | प्रथ्विराज के कोई पुत्र नहीं था | अतः अर्नोराज के सबसे छोटे पुत्र सोमेश्वर राजा बने | उनकी माता कांचन देवी जयसिंह सिद्धराज (solanki ) की पुत्री थी | सोमेश्वर का विवाह त्रिपुरी के शासक अचल कर पुत्री कपुर्देवी से हुआ |
सांभर -अजमेर राजवंश
0.वासुदेव
१.सामंत
३.जयराज
४.विग्रहराज
५.चन्द्रराज (प्रथम )
६.गोपेन्द्रराज (प्रथम )
७.दुर्लभराज
८.गोपेन्द्र राज (गुहक )
9.चन्द्रराज (चन्दन राज )11
१०.गुहक ११
११.चन्द्रराज १११
१२.वाक्पतिराज
१३.सिंहराज (९५० )
१४.विग्रहराज द्वित्य (९७३)
१५.दुर्लभराज ११(९७३-९९७)
१६.गोविन्दराज १११
१७.वाक्पतिराज ११
१८.वीर्यराज
१९ चामुंडाराज
२०.सिंहट
२१.दुर्लभराज १११ (१०७५ -१०८०)
२२.विग्रहराज १११ (१०८०-११०५)
२३.प्रथ्विराज १ (११०५-१११३)
२४.अजयराज (१११३ -११३३)
२५.अर्नोराज (११३३ -११५१ )
२६.जगदेव (११५१-११५२)
२७.विग्रहदेव (विसलदेव ) ११५२-११६३
२८.अपर गांगये (११६३-११६६)
२९.प्रथ्विराज ११ (११६७-११६९)
३०.सोमेश्वर (११७०-११७७)
३१.प्रथ्विराज १११ (११७९-११९२)
३२.गोविन्दराज (११९२-)
३३.हरिराज (११९२ -११९४ )

1 comment:

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