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Saturday, 3 August 2013

देवड़ा चौहानों की खापें और उनके ठिकाने

देवड़ा :- लक्ष्मण ( नाडोल) के तीसरे पुत्र अश्वराज (आसल ) के बाछाछल देवी स्वरूप राणी थी | इसी देवी स्वरूपा राणी के पुत्र 'देवीरा ' (देवड़ा ) नाम से विख्यात हुए | इनकी निम्न खापें है |

१.बावनगरा देवड़ा :- महणसी देवड़ा के पुत्र पुतपमल के पुत्र बीजड़ हुए बीजड़ के तीसरे पुत्र लक्ष्मण के वंशजों का ठिकाना बावनगर था | इस कारन लक्ष्मण के वंशज बावनगरा देवड़ा कहलाये | मेवाड़ में मटोड़ ,देवरी ,लकड़बास आदी ठिकाने तथा मालवा में बरडीया ,बेपर आदी ठिकाने |

२.मामावला देवड़ा :- प्रतापमल उर्फ़ देवराज के छोटे पुत्र बरसिंह को मामावली की जागीर मिली | इस कारन बरसिंह के वंशज मामावला देवड़ा कहलाये |

३.बड़गामा देवड़ा :- बीजड़ के छोटे पुत्र लूणा के पुत्र तिहुणाक थे | इनके पुत्र रामसिंह व् पोत्र देवासिंह को जागीर में बड़गाम देवड़ा कहलाये | बडगाम जोधपुर राज्य का ठिकाना था | सिरोही राज्य में इनका ठिकाना आकुला था |
४.बाग़ड़ीया देवड़ा :- बीजड़ के क्रमशः लूणा ,तिहुणक व् सबलसिंह हुए | सबलसिंह के वंशज बागड़ीया कहलाते है | बडगांव आकन आदी इनके ठिकाने थे |

५. बसी देवड़ा :- बीजड़ के पाचवे पुत्र लूणा के दो पुत्र माणक और मोकल मालवा चले गए | इनकी बसी (ग्वालियर ) जागीर थी | इस कारन इनके वंशज बसी देवड़ा कहलाये |

६.कीतावत देवड़ा :- बीजड़ के पुत्र आबू शासक लूभा हुए | लूभा के पुत्र दूदा के किसी वंशज कीता की संतान कीतावत देवड़ा कहलाई | सिरोही और जोधपुर राज्य में इनकी जागीर थी |

७.गोसलावत देवड़ा :- लूभा के तीसरे पुत्र चाहड़ के पुत्र गोसल के वंशज गोसलावत देवड़ा कहलाये | मामावली ( सिरोही ) में है | खणदरा इनका ठिकाना था |

८.डुंगरोत देवड़ा :- लूंभा के बाद क्रमशः तेजसिंह ,कान्हड़दे ,सामंतसिंह ,सलखा व् रिडमल हुए | रिडमल के दुसरे पुत्र गजसिंह के पुत्र डूंगर के वंशज डूंगरोत देवडों की निम्न खापें है -

१.रामवत - रामवतों के पालड़ी पांडाव ,बागसीण ,जावाल ,सिद्धथ ,जीरावत ,सारादरा ,ओडा आदी ठिकाने थे |
२.सबरावत - माडवास ,सबराट ,सबली ,पूंगनी ,बोखड़ा ,मंडिया ,जामोतरा,मुटेड़ी ,सिरोडेती ,आदी इनके ठिकाने थे | ईडर राज्य (गुजरात ) में भी इनकी जागीरे थी |
३.सूरावत  (सामंतसिहोत ) - कालिन्द्र, थाकेदरा ,भाडवाडीया ,सुआध ,बरलनूट ,नवाणा ,अणगोर ,डोडआ ,बेलगरी ,धानवा चन्दाणी ,वालदा,बाण ,संगालिया ,नीबोड़ा ,आदी इनके ठिकाने थे |
४.मेरावत:- ओदवाड़ा .राडबर ,बाडका ,भेव ,उथमन,पोसलिया ,रुंखाड़ा ,बणदरा ,मोसाल ,पतापूरा ,आदी मेरावतों के ठिकाने थे |
५.अमरावत :- जोगापूरा ,गोला ,रावडो, बूडेरी ,मोटालख्वामा ,जोइला ,घनापूरा व् पोईणा ( जोधपुर राज्य
)इनके ठिकाने थे |
६.भीमावत व् अर्जुनोत - भूतगाँव इनकी जागीरी थी |
७.कूम्पावत -मांडनोत :- सीटल ,मारवाड़ ,पोदहरा, तंवरी,लाय,सीबागाँव ,मांडानी आदी ठिकाने थे |
८.बजावत :- मणदर ,नोरु (जोधपुर ) सवापुरा ,मनोरा ,वेरापूरा मुरोली ,झाडोली,अणदोर ,बावली,भरुडी (जोधपुर ) बडालोटीवाड़ा आदी इनके ठिकाने थे |
9.हरराजोत :- देलदर व् छोटा लोटीवाला आदी इनके ठिकाने थे |
१०.गागवत :- जेला ,सवापूरा ,बड़ी पूनम आदी इनके ठिकाने थे |
11.बेदावत :- चुली ,गोडाणा ,छोटी पूनम (जोधपुर ) आदी इनके ठिकाने थे |
१२ मालणवा :- बीरवाड़ बिरोली ,साणवाडा ,डीगार ,नादीयां ,सीवेरा ,सरवली,पालड़ी ,सूरी आदी इनके ठिकाने थे
रिडमल के पुत्र सिरोही शिवसिंह (शिवभाण ) के वंशज शिवसिहोत देवड़ा कहलाये |इनकी निम्न खापे है |
१.लोटाणचा देवड़ा :-शिवभाण के पुत्र सिंहाजी के वंशज लोटाणचा देवड़ा कहलाये |

२.बालदा देवड़ा :- शिवभाण  के तीसरे पुत्र कावल ने वंशज बालदा देवड़ा कहलाये | धनारी ,सादलवा ,नाना (जोधपुर ) लोहाणाचो व् बालदा ,देवड़ो के ठिकाने थे |
३.लाखानोत देवड़ा :- शिवभाण के पुत्र लखमण के वंशज हे |

१० लखावत देवड़ा :- शिवभाण के पोत्र व् सहसमल के पुत्र लखा के वंशज लखावत देवड़ा कहलाये | नादिया ,जोगापुर, आजारी ,भंडार ,छोटीपाली ,राजा ,बाछोली ,बीसलपुर (मखिड़ा ) साकेड़ा ,सानपूरा ,भागली ,गलधनी ,बिरोलिया ,बलवना ,कोलीवाडा, लसानमड़ा,वाकली ,खिवान्दी ,धुरबाना ,मोरड़,तलाणी ,सलेकरिया ,बलुपूरा ,कोरटा ,पेरवाकला ,पेरवाखर्द आदी लखावतों के ठिकाने थे | जोधपुर रियासत में इनकी जागीरे थी इनकी निम्न खापें है
१ प्रथ्विराजोत :- नीमज ,पीथापुर ,सेलवाड़ा ,मानत ,आबलारी, नीम्बोड़ा,डगाराली ,पीसदरा ,लूणोंल आदी अनेक ठिकाने थे |
२.सामीदासोत :- दामानी ,मालगाव व् थल आदी इनके ठिकाने थे |
३.प्रतापसिहोत :- भटाणा ( बड़ा व् छोटा ) दोनों पादर ,मकावत ( बड़ी व् छोटी दोनों ) मारोज ,ढढमणा ,डाक ,दलाणी ,सगोल आदी इनके बड़े ठिकाने थे |
४.सामंतसिहोत :- हरणी ,रोहूवा ,बरमणा ,बगदा,इदराना ,जोनपुर ,बडबन,कोसवा ,रामपुरा ,सरूआश सगवाड़ा
सणवाड़ा,भावत ,खेदर आदी इनके ठिकाने थे |
11.बालोत देवड़ा :- समर सिंह के पुत्र महणसी के पुत्र बाला के वंशज बालोत देवड़ा कहलाये |
१२.हाथीयोत देवड़ा :- महणसी के पोत्र व् बाला के पुत्र हाथी की संतान हाथीयोत देवड़ा कहलाये |
13.चीबा देवड़ा :- महणसी के पुत्र चीबा के वंशज चीबा कहलाये | आबू के पास रहते थे | नैणसी ने लिखा है सिरोही रै देश डुंगरोत उतरता चीबा भला रजपूत छै इणा रो बड़ो धडो छै ...... एहा देवड़ा हीज है |







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